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You Mean WORLD to me..



I May be stronger than you but not stronger than your Heart...
I May not show my Tears to the world,
But In front of you I cant hold it when I Get hurt..
I may not bend before anybody But I bend before you...
I may stand still if the world ...goes against me but will die if You go Against me...
I am incomplete,
You are the only one who completes me...
You are my Soul,
My Love,
My Life
You Mean WORLD to me....♥
" I LOVE YOU"..:)

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कभी तू मुझसे दूर कहीं , कभी तू मुझमे पास है..



कभी तू मुझसे दूर कहीं , कभी तू मुझमे पास है
हर घड़ी हर लम्हा मुझको , बस तेरी तलाश है ॥
कभी तू साँसों की जुबां , कभी तू दिल की आस है
तू ही तू बातो का मंजर , तू ही मेरी प्यास है ॥

कभी तू आँखों की कशिश , कभी तू मन का राज है
तू ही तू इस दिल के अन्दर , तू ही मेरा साज है ॥
कभी तू लहराती पवन , कभी तू ग़म का राज है
तुझसे ही जन्नत है मेरी , तू ही मेरी आवाज है ॥

कभी तू माथे की चमक , कभी तू मेरा नाम है
तेरे ही हांथो से बनता , मेरा हर एक काम है ॥
कभी यू फूलो की महक , कभी तू प्यारा जाम है
तुझसे है रौशन है रोशनी , तू ही तो हर शाम है ॥

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चाँद से बेखबर उसकी, चांदनी से मिल आया हू



चारो तरफ़ अँधेरा, सब कहते अँधेरी रात है
    बात है कुछ और मगर, सब कहते यही बात है  
    राज की एक बात तुम्हे, मै बतलाने आया हू
    चाँद से बेखबर उसकी, चांदनी से मिल आया हू

    लिपट गई थी चांदनी मुझसे, भूल कर बात सब
    इसीलिए तो छाई थी, देखो अँधेरी रात तब
    नासमझ चांदनी की तुम्हे, दास्तान सुनाने आया हू
    चाँद से बेखबर उसकी, चांदनी से मिल आया हू

    कह गई वह बात मुझसे, जिसका कोई मतलब न था
    बेवफा चाँद भी है, इसका मुझे तलब न था
    चाँद का अँधेरी से रिश्ता, उसको समझाने आया हू
    चाँद से बेखबर उसकी, चांदनी से मिल आया हू

    तुम्हारे ही खातिर चाँद, अँधेरी से मिलने जाता है  
    तुम्हे बेहतर बनाने मे, वह पन्द्रह दिवस लगाता है
   तुम ही हो मोहब्बत चाँद की, यह बतलाने आया हू
    चाँद से बेखबर उसकी, चांदनी से मिल आया हू

    मेरी बातो का असर, चांदनी पर नजर आया है 
    इसीलिए तो देखो फिर, चाँद निखर आया है 
    भूल गम अपने मै, चांदनी मे रंगजाने आया हू  
    चाँद से बेखबर उसकी, चांदनी से मिल आया हू

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कुछ भी हो नाम मेरा, मै जोकर ही कहलाता हू..


अपनी यह कहानी तुमको , कैसे मै सुनाऊ यारो
अश्को के इस दरिया में, मोती कैसे दिखाऊ प्यारो
गम है हजार दिल में पर , मै मुस्कुराता रहता हू
रूठा है रुब मुझसे मेरा, और मै मनाता रहता हू
                                 ***
सोचता हू मै भी कभी , अपना एक घर बसाऊंगा
मेरी तो कीमत ही क्या है, मै क्या ख्वाब सजाऊंगा
रोता हू दिल ही दिल में मै , पर कहता रहता हू
तुम हंसो, सबको हंसाओ, मै भी तो हँसता रहता हू
                                   ***
हंसती है किस्मत मेरी, कहकर मुझे जोकर यहाँ
जीता हू मर-मर के मै , खाकर रोज ठोकर यहाँ
देकर भी सुबकुछ अपना मै, कुछ नहीं पाता हू
कुछ भी हो नाम मेरा, मै जोकर ही कहलाता हू

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आई !!




आई हा एक शब्द आहे असं म्हणण व्यर्थ आहे कारण त्यात आहे जे वात्सल्य शब्दात उतरवणं आहे ते अशक्य!!
आई म्हणजे मंदिराचा उंच कळस
आई म्हणजे अंगणातील पवित्र तुळस
आई म्हणजे भजनात गुणगुणावी अशी संतवाणी
आई म्हणजे आरतीत वाजवावीअशी लयबध्द टाळी
आई म्हणजे वेदनेनंतरची सर्वात पहिली आरोळी.......
मी एक चातक आहे तर ती पर्जन्यचा थेंब आहे
मी अत्तर तर ती त्यातला सुगंध आहे
माझ्या आयुष्याची ती एक चित्रकार आहे
अंधारात मला दिसणारा आशेचा किरण आहे
कोणत्याही वादळात तग धरून राहीलेली माझ्या आयुष्यातील कल्पतरु आहे
जिच्यामुळे मी, माझी कविता आहे
ती माझी......माझीच फक्त आई आहे.........!!

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प्रेम म्हनजे काय असते ?




प्रेम म्हनजे काय असते ?
जे आई ला आपल्या
बाला साठी असते ते?
की जे सैनिकला आपल्या
देशा साठि असते ते? //१//


प्रेम म्हणजे काय असते?
जे फ़ुलाला पाहुन
फ़ुलपाखराला जाणवते ते?
कि जे समुद्राला मिळताच
नदीला जाणवते ते? //२//


प्रेम म्हणजे काय असते?
एकाला लागल्यावर दुसर्याच्या
डोळ्यात पाणी आनते ते?
का एकाच्या सुखासठि दुसरा
कहिहि करायला तयार होतो ते? //३//


पन आता मला कळाले कि
प्रेम म्हणजे काय असते?
जे तुला पाहिल्यावर
माझ्या मनात येते ते
आणी जे तुझ्या आठवणीनि
माझ्या डोळ्यात येते ते//४//




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Sangini ..

   

  एक नई सुबह आकर मेरे,
    गालो को छू गई,
    उठकर देखा तो तुम्हारे,
    होठो के निशाँ थे वहाँ

    न जाने क्यू दिल का मेरे,
    गुलशन आज महक उठा
    आँख खुली तो पाया मैंने,
    तुमसे गुलिश्तां जवाँ थे वहाँ

    कुछ बदला सा है मौसम आज,
    कुछ बदले मेरे हुजूर है
    फूलो से कलियों तलक सब,
    उनके नशे में चूर है
    एक चाँदनी रात भर,
    साथ मेरे झूमती रही
    धूप खिली तो पाया मैंने,
    तुम्हारे कदमो के दास्ताँ थे वहाँ

    न जाने यह अंग मेरा,
    कब, कौन, कहा से, रंग गया
    जब होश आया तो पाया मैंने,
    तुम्हारे हांथो के पैमाँ थे वहाँ

    कुछ दिल का मेरे कसूर है,
 
    कुछ छाया उनका सुरूर है 
 
    अब हवा भी यह कह रही,
 
    यह असर उनका जरूर है
 
    एक छाव संग मेरे,
 
    न जाने कब से चल रही 
 
    नजर झुकी तो पाया मैंने,
 
    तुम्हारे ही तो ऐहसान थे वहाँ

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